Wednesday, 8 June 2016
माफ करा बाबा
बाबा
नका येऊ
परत तुम्ही
कारण
इथं आल्यावर
तुम्हाला
कोणत्या पक्षात
घ्यायचं
याचीच वढातांन
सुरु राहील
अन् विषय राहिला
आमचा बाबा
तर आम्ही
गद्दार झालो आहोत
वेगवेळ्या गटात
वाटलो गेलो आहोत
आमचा निळा झेंडा
फक्त 14 एप्रिललाच फडकतो
बाकी दिवस तो
इतर पक्षात जाऊन अडकतो
खूप केलत बाबा तुम्ही
आम्हाला त्याची जाण नाही
अन् पुन्हा कमरेला
झाडू आल्याशिवाय
स्वतःला तुमचे
अनुयायी म्हणवणारे
बहुदा सुधारणार नाही.
रवींद्र कांबळे 9112143360
डाॅ. बाबासाहेबांचा शेवटचा संदेश... मंगळवार दि.31जुलै1956.
डाॅ. बाबासाहेबांचा शेवटचा संदेश...मंगळवार दि.31जुलै1956.
माझी पहिली खंत ही आहे की, मी माझे जीवन कार्य पुर्ण करू शकलेलो नाही.माझे लोक इतर समाजाशी बरोबरीपुर्वक राजकीय सत्तेचे वाटेकरी होऊन सत्ताधारक वर्ग बनलेले पाहण्याची माझी इच्छा होती.जे काही मी मिळवू शकलो त्याचा फायदा ' मुठभर सुशिक्षितांनी ' घेतला आहे,पण ' त्यांचे विश्वासघातकी वागणे ' आणि दलित शोषितांबद्दची त्यांची अनास्था पाहिल्यावर ते फारच नालायक निघाले असेच म्हणावे लागेल.ते माझ्या कल्पना शक्तीच्या पलीकडे गेले आहे.ते फक्त स्वत:साठी आणि त्याच्यां व्यक्तीगत फायद्यासाठीच जगतात.त्याच्यांपैकी एकही जन सामाजिक कार्य करायला तयार नसतो.ते आत्मघाताच्या वाटेने निघाले आहेत.माझ्या ज्या सहकार्याबद्दल ती चळवळ चालवतील असा माझा विश्वास आणि भरवसा होता ते आज नेतृत्वासाठी आणि सत्तेसाठी एकमेकांत भांडत आहेत.त्यांच्या शिरावर येऊ घातलेली जबाबदारी ही किती मोठी आहे त्यांच्या ध्यानी मनीही असल्याचे दिसत नाही.
मी त्यांच्यासाठी जे काही मिळवून देऊ शकलो ते मी एकठयाच्या बळावर मिळवले आहे.ते करताना पिळवटून टाकणार्या संकटांचा आणि अनंत अडचणींचा मुकाबला मला करावा लागला.सगळीकडून विशेषत: हिंदू वृत्तपत्रसृष्टीकडून माझ्यावर शिव्याशापांचा वर्षाव सतत होत राहिला.जन्मभर मी माझ्या विरोधकांशी संघर्ष केला,माझ्या स्वत:च्या काही लोकांनी मला स्वार्थासाठी गंडवले,त्यांच्याशीही मी दोन हात केले.मी माझ्या आयुष्याच्या अखेरच्या क्षणापर्यंत देशाची आणि पददलितांची सेवा करीतच राहीन.हा काफला(चळवळ)आज जेथे दिसतो तेथे त्याला आणता-आणता मला खूप सायास पडले.हा काफला असाच त्यांनी पूढे आणखी पूढे चालू ठेवावा.वाटेत अनेक अडथळे येतील,अडचणी येतील,अकल्पित संकटे कोसळतील, पण वाटचाल सुरूच ठेवावी.त्यांना जर सन्मानाने प्रतिष्ठापूर्वक जीवन जगायची इच्छा असेल तर हे आव्हान त्यांनी पेलायलाच पाहिजे.जर माझे लोक माझे सहकारी हा काफला पूढे नण्यास असमर्थ ठरलेच तर किमान तो आज जेथे आहे तेथे तरी त्यांनी त्यास राहू द्यावे.कोणत्याही परिस्थितीत त्यांनी या काफल्यास परत फिरू देऊ नये.हा माझा संदेश आहे.बहूधा शेवटचा संदेश आहे.मी तो अत्यंत गंभीरपणे देत आहे आणि या गांभीर्याला नजरे आड केले जाणार नाही अशी खात्री मला वाटते.
संदर्भ:डाॅ बाबासाहेब आंबेडकर अनुभव आणि आठवणी-
नानक चंद रत्तू.
पृष्ठ 227-230.
(कृपाया, सर्व बौध्दांना आणि इतर आंबेडकरी विचाराच्या कार्यकर्त्यांना पाठवावा.)
Tuesday, 7 June 2016
अगर आपको लगता है अंग्रेज भारत के लुटेरे और अन्यायी थे तो आप अब भी गलत है
अगर आपको लगता है अंग्रेज भारत के लुटेरे और अन्यायी थे तो आप अब भी गलत है
फिर अंग्रेजों द्वारा आपके लिए की गई उपलब्धियां भी जान लीजिये
और जानिये ब्राम्हणो द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ किये गए आंदोलन की वजह....
1- अंग्रेजो ने 1795
में अधिनयम 11 द्वारा
शुद्रों को भी सम्पत्ति
रखने का कानून बनाया।
2- 1773 में ईस्ट इंडिया
कम्पनी ने रेगुलेटिग एक्ट
पास किया जिसमें न्याय
व्यवस्था समानता पर
आधारित थी।6 मई 1775
को इसी कानून द्वारा
बंगाल के सामन्त ब्राह्मण
नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी।
3- 1804 अधिनीयम 3 द्वारा कन्या हत्या पर रोक
अंग्रेजों नेलगाई (लडकियों
के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के
स्तन पर
धतूरे का
लेप लगाकर, एवम्
गढ्ढाबनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा
जाता था
4- 1813 में ब्रिटिश सरकार
ने कानून बनाकर शिक्षा
ग्रहण करने का सभी
जातियों और धर्मों के
लोगों को अधिकार दिया।
5- 1813 में ने दास प्रथा
का अंत कानून बनाकर
किया।
6- 1817 में समान नागरिक
संहिता कानून बनाया
(1817 के पहले सजा का
प्रावधान वर्ण के आधार
पर था। ब्राह्मण को कोई
सजा नही होती थी ओर
शुद्र को कठोर दंड दिया
जाता था। अंग्रेजो ने सजा
का प्रावधान समान कर
दिया।)
7- 1819 में अधिनियम 7
द्वारा ब्राह्मणों द्वारा शुद्र
स्त्रियों के शुद्धिकरण पर
रोक लगाई। (शुद्रोंकी शादी
होने पर दुल्हन को अपने
यानि दूल्हे के घर न जाकर
कम से कम तीन रात ब्राह्मण के घर शारीरिक
सेवा देनी पड़ती थी।)
8- 1830 नरबलि प्रथा पर
रोक
( देवी -देवता को प्रसन्न
करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों,
स्त्री व् पुरुष दोनों को मन्दिर
में सिर पटक पटक कर
चढ़ा देता था।)
9- 1833 अधिनियम 87
द्वारा सरकारी सेवा में भेद
भाव पर रोक अर्थात
योग्यता ही सेवा का
आधार स्वीकार किया
गया तथा कम्पनी के
अधीन किसी भारतीय
नागरिक को जन्म स्थान,
धर्म, जाति या रंग के
आधार पर पद से वंचित
नही रखा जा सकता है।
10-1834 में पहला भारतीय विधि आयोग
का गठन हुआ। कानून
बनाने की व्यवस्था जाति,
वर्ण, धर्म और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर करना आयोग का प्रमुख उद्देश्य था।
11-1835 प्रथम
पुत्र को गंगा दान पर रोक (ब्राह्मणों ने नियम बनाया
की शुद्रों के घर यदि पहला
बच्चा लड़का पैदा हो तो
उसे गंगा में फेंक देना
चाहिये।
पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं
स्वस्थ पैदा होता है।यह
बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न
पाए इसलिए पैदा होते ही
गंगा को दान करवा देते थे।
12- 7 मार्च 1835 को
लार्ड मैकाले ने शिक्षा
नीति राज्य का विषय
बनाया और उच्च शिक्षा
को अंग्रेजी भाषा का
माध्यम बनाया गया।
13- 1835 को कानून
बनाकर अंग्रेजों ने शुद्रों
को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया।
14- दिसम्बर 1829 के
नियम 17 द्वारा विधवाओं
को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया।
15- देवदासी प्रथा पर
रोक लगाई।ब्राह्मणों के
कहने से शुद्र अपनी
लडकियों को मन्दिर की
सेवा के लिए दान देते थे। मन्दिर के पुजारी उनका
शारीरिक शोषण करते थे।
बच्चा पैदा होने पर उसे
फेंक देते थे।और उस
बच्चे को हरिजन नाम
देते थे।
1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़
23 लाख थी जिसमें 2
लाख देवदासियां मन्दिरों
में पड़ी थी।
यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मन्दिरो में चल
रही है।
16- 1837 अधिनियम
द्वारा ठगी प्रथा का अंत
किया।
17- 1849 में कलकत्ता
में एक बालिका विद्यालय
जे ई डी बेटन ने स्थापित
किया।
18- 1854 में अंग्रेजों ने
3 विश्वविद्यालय कलकत्ता
मद्रास और बॉम्बे में
स्थापित किये। 1902 मे
विश्वविद्यालय आयोग
नियुक्त किया गया।
19- 6 अक्टूबर 1860
को अंग्रेजों ने इंडियन
पीनल कोड बनाया।
लार्ड मैकाले ने सदियों
से जकड़े शुद्रों की
जंजीरों को काट दिया
ओर भारत में जाति, वर्ण
और धर्म के बिना एक
समान क्रिमिनल लॉ
लागु कर दिया।
20- 1863 अंग्रेजों ने कानून बनाकर चरक
पूजा पर रोक लगा दिया (आलिशान भवन एवं पुल
निर्माण पर शुद्रों को
पकड़कर जिन्दा चुनवा
दिया जाता था इस पूजा
में मान्यता थी की भवन
और पुल ज्यादा दिनों
तक टिकाऊ रहेगें।
21- 1867 में बहू विवाह
प्रथा पर पुरे देश में
प्रतिबन्ध लगाने के
उद्देश्य से बंगाल सरकार
ने एक कमेटी गठित
किया ।
22- 1871 में अंग
्रेजों ने भारत में जातिवार गणना प्रारम्भ की। यह जनगणना 1941 तक
हुई । 1948 में पण्डित
नेहरू ने कानून बनाकर जातिवार गणना पर
रोक लगा दी।
23- 1872 में सिविल
मैरिज एक्ट द्वारा 14
वर्ष से कम आयु की कन्याओं एवम् 18 वर्ष
से कम आयु के लड़को
का विवाह वर्जित करके
बाल विवाह पर रोक
लगाई।
24- अंग्रेजों ने महार और चमार रेजिमेंट बनाकर
इन जातियों को सेना में
भर्ती किया लेकिन 1892
में ब्राह्मणों के दबाव के कारण सेना में अछूतों की भर्ती बन्द हो गयी।
25- रैयत वाणी पद्धति अंग्रेजों ने बनाकर प्रत्येक पंजीकृत भूमिदार को
भूमि का स्वामी स्वीकार
किया।
26- 1918 में साऊथ
बरो कमेटी को भारत मे
ं अंग्रेजों ने भेजा। यह कमेटी भारत में सभी
जातियों का विधि
मण्डल (कानून बनाने
की संस्था) में भागीदारी
के लिए आया था। शाहू
जी महाराज के कहने पर पिछङो के नेता भाष्कर
राव जाधव ने एवम्
अछूतों के नेता डा
अम्बेडकर ने अपने लोगों
को विधि मण्डल में
भागीदारी के लिये
मेमोरेंडम दिया।
27- अंग्रेजो ने 1919 में भारत सरकार अधिनियम का गठन किया ।
28- 1919 में अंग्रेजो ने ब्राह्मणों के जज बनने प
र रोक लगा दी थी और
कहा था की इनके अंदर
न्यायिक चरित्र नही
होता है।
29- 25 दिसम्बर 1927
को डा अम्बेडकर द्वारा
मनु समृति का दहन किया।
30- 1 मार्च 1930 को
डा अम्बेडकर द्वारा काला
राम मन्दिर (नासिक)
प्रवेश का आंदोलन
चलाया।
31- 1927 को अंग्रेजों ने कानून बनाकर शुद्रों के सार्वजनिक स्थानों पर
जाने का अधिकार दिया।
32- नवम्बर 1927 में साइमन कमीशन की
नियुक्ति की।जो 1928 में
भारत के लोगों को
अतिरिक्त अधिकार देने
के लिए आया। भारत के
लोगों को अंग्रेज अधिकार न दे सके इसलिए इस कमीशन के भारत पहुँचते ही गांधी ने
इस कमीशनके विरोध में बहुत बड़ा आंदोलन
चलाया। जिस कारण
साइमन कमीशन अधूरी
रिपोर्ट लेकर वापस
चला गया। इस पर
अंतिम फैसले के लिए
अंग्रेजों ने भारतीय
प्रतिनिधियों को 12
नवम्बर 1930 को लन्दन गोलमेज सम्मेलन में
बुलाया।
33- 24 सितम्बर 1932
को अंग्रेजों ने कम्युनल
अवार्ड घोषित किया
जिसमें प्रमुख अधिकार
निम्न दिए----
A--वयस्क मताधिकार
B--विधान मण्डलों और
संघीय सरकार में
जनसंख्या के अनुपात
में अछूतों को आरक्षण
का अधिकार
C--सिक्ख, ईसाई और मुसलमानों की तरह
अछूतों को भी स्वतन्त्र
निर्वाचन के क्षेत्र का
अधिकार मिला। जिन
क्षेत्रों में अछूत प्रतिनिधि
खड़े होंगे उनका चुनाव केवल अछूत ही करेगें।
D--प्रतिनिधियोंको चुनने
के लिए दो बार वोट का
अधिकार मिला जिसमें
एक बार सिर्फ अपने
प्रतिनिधियों को वोट देंगे
दूसरी बार सामान्य
प्रतिनिधियों को वोट देगे।
34- 19 मार्च 1928 को बेगारी प्रथा के विरुद्
ध डा अम्बेडकर ने मुम्बई
विधान परिषद में आवाज
उठाई। जिसके बाद
अंग्रेजों ने इस प्रथा को
समाप्त कर दिया।
35- अंग्रेजों ने 1 जु
लाई 1942 से लेकर 10 सितम्बर 1946 तक डाॅ अम्बेडकर को वायसराय
की कार्य साधक
कौंसिल में लेबर मेंबर
बनाया। लेबरो को डा अम्बेडकर ने 8.3 प्रतिशत आरक्षण दिलवाया।
36-- 1937 में अंग्रेजों
ने भारत में प्रोविंशियल गवर्नमेंट का चुनाव
करवाया।
37-- 1942 में अंग्रेजों
से डा अम्बेडकर ने 50
हजार हेक्टेयर भूमि को
अछूतों एवम् पिछङो में
बाट देने के लिए अपील
किया ।
अंग्रेजों ने 20 वर्षों की
समय सीमा तय किया था।
38- अंग्रेजों ने शासन प्रसासन में ब्राह्मणों की भागीदारी को 100% से 2.5% पर लाकर खड़ा
कर दिया था।
इन्ही सब वजाह से ब्राह्मणों
ने अन्ग्रेजो के खिलाफ़
क्रांति शुरू कर दी क्योकि
अन्ग्रेजो ने शुद्रो को सारे अधिकार दे दीये थे और
सब जातियो के लोगो को एक समान अधिकार देकर सबको बराबरी मे लाकर खडा किया।
'वसंत ऋतू म्हणजे बहरलेली सृष्टी आणि माझ्या नशिबी हरवलेली दृष्टी.'
एक आंधळा भिकारी रस्त्यावर एका बाजूला बसलेला.
त्याच्याकडे कुणाचेही लक्ष नाही.
तो एवढा दरिद्री आहे की,
त्याला अश्रूदेखील महाग झालेत.
गेली कित्येक वर्षे तो रडलेला नाही.
एक लेखक पूर्णपणे दिवाळं वाजलेला.
खिशात दमडीदेखील नाही आणि फिरायला बाहेर पडतो.
त्याची नजर त्या भिकार्याकडे आणि त्याच्या त्या करूण अवस्थेकडे जाते.
त्या भिकार्याच्या बाजूला एक पाटी आणि दोन-तीन खडू पडलेले.
हा लेखक त्या भिकार्याकडे जातो आणि म्हणतो,
'मित्रा, मी एक लेखक आहे,
ज्याच्याकडे एक 'पै' देखील नाही.
पण माझ्याकडे कला आहे.
माझ्याकडे शब्दांची शक्ती आहे.
ती मी तुला देऊ शकतो.
तुझ्या परवानगीने मी या पाटीवर काही लिहू का?'
'साहेब', भिकारी म्हणतो,
'माझ्याशी कुणी बोलतदेखील नाही.
मी एक गरीब आंधळा भिकारी. तुम्हाला त्या पाटीचं जे ठिक वाटतं ते करा.'
तो लेखक त्या पाटीवर काहीतरी लिहून निघून जातो.
त्या क्षणापासून भिकार्याच्या लक्षात येते की,
एकदम जाणार्या-येणार्यांपैकी प्रत्येकजण त्याच्याजवळ थांबून त्याच्या पुढ्यात पैसे टाकू लागलाय.
थोड्याच वेळात तिथे पैशाची रास जमते.
तो भिकारी बेचैन होतो.
नाण्यांची रास वाढतच जाते.
तो एवढा अस्वस्थ होतो की, पैसे टाकणार्यांपैकी एकाचा हात पकडतो आणि म्हणतो, 'साहेब, माफ करा तुमचा हात पकडल्याबद्दल.
मी एक गरीब आंधळा भिकारी आहे.
मला कृपा करुन जर या पाटीवर काय लिहिलंय ते वाचून दाखवलेत तर फार उपकार होतील हो.'
तो माणूस पाटी उचलतो आणि वाचायला लागतो.
'वसंत ऋतू म्हणजे बहरलेली सृष्टी
आणि माझ्या नशिबी हरवलेली दृष्टी.'
भिकार्याच्या गालावरुन अश्रू ओघळायला लागतात.
आयुष्य कुणी जास्त जाणलं?
या ओळी लिहिणार्या लेखकानं?
त्या ओळी वाचून पैसे टाकणार्या लोकांनी?
...कि इतक्या वर्षांनी रडणार्या
त्या भिकार्यानं?
तुमचे डोळे चांगले असतील तर तुम्ही जगाच्या प्रेमात पडाल.
...पण जर तुमची वाणी गोड असेल,
तर हे जग तुमच्या प्रेमात पडेल.
माणसाला बोलायला शिकण्यास (किमान) २ वर्ष लागतात.
पण 'काय बोलावे?' हे शिकण्यास पूर्ण आयुष्य निघून जाते.
'ओढ म्हणजे काय?'
हे जीव लावल्याशिवाय कळत नाही.
'प्रेम म्हणजे काय?'
हे स्वतः केल्याशिवाय कळत नाही.
'विरह म्हणजे काय?'
हे प्रेमात पडल्याशिवाय कळत नाही.
'जिंकण म्हणजे काय?'
हे हरल्याशिवाय कळत नाही.
'दुःख म्हणजे काय?'
हे अपेक्षाभंग झाल्याशिवाय कळत नाही.
'सुख म्हणजे काय?'
हे दुसऱ्याच्या हास्यात शोधल्याशिवाय कळत नाही.
'समाधान म्हणजे काय?'
हे आपल्यात शोधल्याशिवाय कळत नाही.
'मैत्री म्हणजे काय?'
हे ती केल्याशिवाय कळत नाही.
'आपली माणसं कोण?'
हे संकटांशिवाय कळत नाही.
'सत्य म्हणजे काय?'
हे डोळे उघडल्याशिवाय कळत नाही.
'उत्तर म्हणजे काय?'
हे प्रश्न पडल्याशिवाय कळत नाही.
'जबाबदारी म्हणजे काय?'
हे त्या सांभाळल्याशिवाय कळत नाही.
'काळ म्हणजे काय?'
हे तो निसटून गेल्याशिवाय कळत नाही.
✌✌✌✌✌✌✌✌
जरूर शेअर करा.
मी जयभिम घेताच तुले मोठा राग आला -महाकवी नामदेव ढसाळ
तुले मोठा राग आला
दोन वर्ग शिकला नसनं
पण मोठा माज आला ......
पडुन होता पोयट्यासारखा
घोंगवत होत्या माशा
नवता कपडा आंगावर
खराब होती दशा
आरक्षणच्या मात्यावर
खुप मोठा साहेब झाला
अन् मी जयभिम घेताच
तुले मोठा राग आला......
खुप होत्या पोथ्या
अन् खुप होते देव
दररोज वात लावुन
म्हणे मले सुखी ठेव
पहील्या वर्गापासुन
खुप सवलत घेत आला.....
अन् मी जयभिम घेताच
तुले मोठा राग आला........
नवतं त्याच्या पिढीत
कधी कुणी शिकल
वावरात नारळ फोडुन
कधी नाही पिकल
बांधावरच पाणी
दिमाखान घेत आला.....
अन् मी जयभिम घेताच
तुले मोठा राग आला.....
ज्यान केला राग त्याचा
त्याच्या माग धावला
त्याच्या सांगण्यावरुन
फोटो नाही लावला
त्याच जड पारड
तु हलक करत आला...
अन् मी जयभिम घेताच
तुले मोठा राग आला.....
तुले नवत माहीत
तु आहे कोण
कायदयाच्या नावान
करत हात दोन
तु आता कायदा
लोकाले सांगत आला......
अन् मी जयभिम घेताच
तुले मोठा राग आला .....
नाही आपली अक्कल
भिमावानी केली
त्याच्या एवढ शिकाव
हिम्मत नाही केली
दम नाही रक्तात
पण जातीभेद करत आला.....
अन् मी जयभिम घेताच
तुले मोठा राग आला......
आतातरी सुधर
सोड आता गर्व
धर्मग्रंथाच्या नावान
करुन दाखव सर्व
माहीत असुन तुले
मस्त नाटक करत आला ......
अन् मी जयभिम घेताच
तुले मोठा राग आला ......
................
-महाकवी नामदेव ढसाळ
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प्रश्न 1- डॉ अम्बेडकर का जन्म कब हुआ था
उत्तर- 14 अप्रैल 1891
प्रश्न 2- डॉ अम्बेडकर का जन्म कहां हुआ था
उत्तर- मध्य प्रदेश इंदौर के महू छावनी में हुआ था
प्रश्न 3- डॉ अम्बेडकर के पिता का नाम क्या था
उत्तर- रामजी मोलाजी सकपाल था
प्रश्न 4- डॉ अम्बेडकर की माता का नाम क्या था
उत्तर- भीमा बाई
प्रश्न5- डॉ अम्बेडकर के पिता का क्या करते थे
उत्तर- सेना मैं सूबेदार थे
प्रश्न 6- डॉ अम्बेडकर की माता का देहांत कब हुआ था
उत्तर-1896
प्रश्न 7- डॉ अम्बेडकर की माता के देहांत के वक्त उन कि आयु क्या थी
उत्तर- 5 वर्ष
प्रश्न8- डॉ अम्बेडकर किस जाती से थे
उत्तर- महार जाती
प्रश्न 9- महार जाती को कैसा माना जाता था
उत्तर- अछूत (निम्न वर्ग )
प्रश्न10- डॉ अम्बेडकर को स्कूल मैं कहां बिठाया जाता था
उत्तर- क्लास के बहार
प्रश्न 11- डॉ अम्बेडकर को स्कूल मैं पानी कैसे पिलाया जाता था
उत्तर- ऊँची जाति का व्यक्ति ऊँचाई से पानी उनके हाथों परडालता था
प्रश्न12- बाबा साहब का विवाह कब और किस से हुआ
उत्तर- 1906 में रमाबाई से
प्रश्न 13- बाबा साहब ने मैट्रिक परीक्षा कब पास की
उत्तर- 1907 में
प्रश्न 14- डॉ अम्बेडकर के बंबई विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने से क्या हुवा
उत्तर- भारत में कॉलेज में प्रवेश लेने वाले पहले अस्पृश्य बन गये
प्रश्न 15- गायकवाड़ के महाराज ने डॉ अंबेडकर को पढ़ने कहां भेजा
उत्तर- कोलंबिया विश्व विद्यालय न्यूयॉर्क अमेरिका भेजा
प्रश्न 16- बैरिस्टर के अध्ययन के लिए बाबा साहब कहां और कब गए
उत्तर- 11 नवंबर 1917 लंदन में
प्रश्न 17- बड़ौदा के महाराजा ने डॉ आंबेडकर को अपने यहां किस पद पर रखा
उत्तर- सैन्य सचिव पद पर
प्रश्न 18- बाबा साहब ने सैन्य सचिव पद को क्यों छोड़ा
उत्तर- छुआ छात के कारण
प्रश्न 19- बड़ौदा रियासत में बाबा साहब कहां ठहरे थे
उत्तर- पारसी सराय में
प्रश्न 20- डॉ अंबेडकर ने क्या संकल्प लिया
उत्तर- जब तक इस अछूत समाज की कठिनाइयों को समाप्त ने कर दूं तब तक चैन से नहीं बैठूंगा
प्रश्न 21- डॉ अंबेडकर ने कौनसी पत्रिका निकाली
उत्तर- मूक नायक
प्रश्न 22- बाबासाहेब वकील कब बने
उत्तर- 1923 में
प्रश्न 23- डॉ अंबेडकर ने वकालत कहां शुरु की
उत्तर- मुंबई के हाई कोर्ट से
प्रश्न 24- अंबेडकर ने अपने अनुयायियों को क्या संदेश दिया
उत्तर- शिक्षित बनो संघर्ष करो संगठित रहो
प्रश्न 25- बाबा साहब ने बहिष्कृत भारत का प्रकाशन कब आरंभकिया
उत्तर- 3 अप्रैल 1927
प्रश्न 26- बाबासाहेब लॉ कॉलेज के प्रोफ़ेसर कब बने
उत्तर- 1928 में
प्रश्न 27- बाबासाहेब मुंबई में साइमन कमीशन के सदस्य कब बने
उत्तर- 1928 में
प्रश्न 28- बाबा साहेब द्वारा विधानसभा में माहर वेतन बिल पेश कब हुआ
उत्तर- 14 मार्च 1929
प्रश्न 29- काला राम मंदिर मैं अछुतो के प्रवेश के लिए आंदोलन कब किया
उत्तर- 03 मार्च 1930
प्रश्न 30- पूना पैक्ट किस किस के बीच हुआ
उत्तर- डॉ आंबेडकर और महात्मा गांधी
प्रश्न 31- महात्मा गांधी के जीवन की भीख मांगने बाबा साहब के पास कौनआया
उत्तर- कस्तूरबा गांधी
प्रश्न 32- डॉ अम्बेडकर को गोल मेज कॉन्फ्रंस का निमंत्रण कब मिला
उत्तर- 6 अगस्त 1930
प्रश्न 33- डॉ अम्बेडकर ने पूना समझौता कब किया
उत्तर- 1932
प्रश्न 34- अम्बेडकर को सरकारी लॉ कॉलेज का प्रधानचार्य नियुक्त कियागया
उत्तर- 13 अक्टूबर 1935 को,
प्रश्न 35- मुझे पढे लिखे लोगोँ ने धोखा दिया ये शब्द बाबा साहेब ने कहां कहे थे उत्तर- आगरा मे 18 मार्च 1956
प्रश्न 36- बाबा साहेब के पि. ए. कोन थे
उत्तर- नानकचंद रत्तु
प्रश्न 37- बाबा साहेब ने अपने अनुयाइयों से क्या कहा था
उत्तर- इस करवा को मै बड़ी मुस्किल से यहाँ तक लाया हु !
इसे आगे नहीं ले जा सकते तो पीछे मत जाने देना
प्रश्न 38- देश के पहले कानून मंत्री कौन थे
उत्तर- डॉ अम्बेडकर
प्रश्न 39- स्वतंत्र भारत के नए संविधान की रचना किस ने की
उत्तर- डॉ अम्बेडकर
प्रश्न 40- डॉ अंबेडकर ने भारतीय संविधान कितने समय में लिखा
उत्तर- 2 साल 11 महीने 18 दिन
प्रश्न 41- डा बी.आर. अम्बेडकर ने बौद्ध धर्मं कब और कहा अपनाया
उत्तर- 14 अक्टूबर 1956, दीक्षा भूमि, नागपुर
प्रश्न 42- डा बी.आर. अम्बेडकर ने बौद्ध धर्मं कितने लोगों के साथ अपनाया
उत्तर- लगभग 10 लाख
प्रश्न 43- राजा बनने के लिए रानी के पेट की जरूरत नहीं,
तुम्हारे वोट की जरूरत है ये शब्द किस के है
उत्तर- डा बी.आर. अम्बेडकर
प्रश्न 44- डा बी.आर. अम्बेडकर के दुवारा लिखित महान पुस्तक का क्या नाम है
उत्तर- दी बुद्ध एंड हिज धम्मा
प्रश्न 45- बाबा साहेब को किस पुरस्कार से सम्मानित किया गया
उत्तर- भारत रत्न (1990)
प्रश्न 46- बाबा साहेब ने किस राजनैतिक पार्टी का गठन किया
उत्तर- रिपब्लिकन पार्टी
प्रश्न 47- बाबा साहब ने कितनी प्रतिज्ञाएं की
उत्तर- 22
प्रश्न 48- संविधान निर्माता किसे माना जाता है
उत्तर- डॉ भीमराव अंबेडकर
प्रश्न 49- डॉ आंबेडकर ने कौन कौन सी डिग्री हासिल की
उत्तर- एम. ए , पी.एच.डी.,(कोलम्बिया ) डी.एस.सी.,(लंदन) एल. एल. डी., (कोलम्बिया)
डी.लिट.(उस्मानिया ) बार. अंट. ला.(लंदन)
प्रश्न 50- बाबा साहब ने किस राजनैतिक पार्टी का गठन किया
उत्तर- रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया
प्रश्न 51- बाबा साहेब का महा परीनिर्वाण कब हुआ
उत्तर- 6 दिसंबर 1956
प्रश्न 52 डा बी.आर. अम्बेडकर ने अंतिम सांस कहा ली
उत्तर- 26,अलीपुर रोड दिल्ली
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बात उस वक़्त की है जब बाबासाहब अपनी अंतिम पुस्तक "बुद्ध और उनका धम्म" लिख रहे थे। उस वक़्तवो बंगला न. 26, अलीपुर रोड, दिल्ली में रहते थे। एक शाम खाना खाने के बाद लगभग 8 बजे के आसपास वो अपने अध्धयन कक्ष में गए
और लिखना शुरू कर दिया। उनके निजी सहयोगी 'नानकचन्द रत्तू ' जरूरी काम निबटा कर उनकी कुर्सी के पास खड़े हो गए और उनके आदेश
की प्रतीक्षा करने लगे। कुछ देर बाद बाबा साहब ने हल्की सी नज़रें ऊपर उठाई और रत्तू जी से कहा कि तुम जाकर सो जाओ, सुबह आ जाना।
अपने साहब का आदेश पाकर वो चले गए। रोज़ाना की तरह सुबह लगभग 8 बजे ही रत्तू बाबासाहब के पास पहुँचे।
उन्होंने देखा कि जिस अवस्था मे वो बाबा साहब को छोड़कर गए थे ठीक उसी अवस्था में बाबा साहब अपनी कुर्सी पर बैठकर लिख रहे थे।
उन्हें लिखते लिखते लगभग 12 घण्टे हो चुके थे। रत्तू जी चुपचाप उनकी कुर्सी के बराबर में खड़े हो गए।
उन्हें खड़े हुए बहुत देर ही गयी लेकिन बाबा साहब ने ऊपर नज़र उठाकर ही नही देखा। वो अपने लेखन में इतने व्यस्त थे कि उन्हें किसी बात का होश
नही था।
किसी साधक की साधना को भंग करना हर किसी के बस की बात नही होती। वो बाबा साहब की साधना ही थी। रत्तू जी, बाबा साहब का ध्यान अपनी तरफ लाने के लिए मेज पर रखी कुछ किताबो को उठाकर ठीक ढंग से रखने लगे।
तब बाबासाहब ने हल्की सी नज़र उठाई और रत्तू जी से कहा - रत्तू तुम अभी गए नही। रत्तू जी उनके पैरोँ के पास बैठ गए और आँखों में आंसू भरकर कहने लगे - बाबासाहब सुबह के 8:30 बज चुके है। आपको 12 घण्टे हो चुके है। आखिर आप इतनी महनत क्यों कर रहे हो? बाबासाहब ने कहा - रत्तू, मेरा समाज अभी बहुत पीछे है। मेरे लोग अभी भी दिशाहीन है। मेरे मरने के बाद मेरी ये किताबे ही तो उनको राह
दिखाएंगी। अब मै पूरे देश में, हर घर में तो नही जा सकता लेकिन मेरा साहित्य जरूर जायेगा। लोग मेरे
विचारो को समझ पाएंगे। मेरे सिद्धांत, विचार, दर्शन और आदर्श मेरी किताबो में ही मिलेंगे। इसलिए मै
इतनी मेहनत कर रहा हूँ।
( नानकचन्द रत्तू जी द्वारा लिखित पुस्तक - डॉ. अम्बेडकर, कुछ अनछुए पहलू से)
